चीरहरण के बाद भी द्रौपदी ने दिखाई थी ऐसी हिम्मत जिसे सुनकर आज भी रूह कांपती है।

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आज हम आपको महाभारत के पुराने इतिहास की तरफ ले चलेंगे जी हां हमारे इस पीढ़ी के लिए ये जानना भी बेहद जरूरी है की आखिर द्रौपदी थी कौन और आखिर द्रौपदी का चीर हरण क्यों किया गया साथ ही पांडवो से उनका क्या सम्ब्नध था। इस प्रकार के सभी सवालों का जवाब दे पाना सबके बस की बात नहीं है क्युकी उस समय की महिलाए शक्तिशाली , और बेहद वीर हुआ करती थी छोटे कष्टों से वो भयभीत नहीं होती थी बल्कि द्रौपदी ने तो महिलाओ को गर्व से जीने के लिए कई प्रथाओं का अंत भी करने को कहा था बल्कि खुद द्रौपदी ने ना जाने कितनी ही प्रथाओं का अंत किया था । आज हम आपको द्रौपदी से जुडी कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे है जिनकी शिक्षा ना तो आपको स्कूल में मिलेगी ना कही और से क्युकी अब किसी पाठ्यक्रम में बच्चो को ये शिक्षा दी ही नहीं जाती तो आइये आपको बताते है की आखिर द्रौपदी को क्यों माना गया महान ।

महाभारत में सम्पूर्ण नारी का रूप थी द्रौपदी

आज हम आपको महाभारत से जुडी कुछ ज्ञानवर्धक बाते बताने जा रहे है जहा द्रौपदी को सम्पूर्ण नारी माना गया है जिसने अपना सब कुछ त्याग कर भी नारी का मान सम्मान रखा महाभारत का युद्ध कौरवो और पांडवो के बीच हुआ था । कौरवो का [अपने चचेरे भाइयो के प्रति ईर्ष्या का भाव युद्ध का कारण बना । और उस से पहले द्रौपदी के साथ हुई इस घटना ने पांडवो को झकझोर के रख दिया ।

पांच पतियों वाली पहली महिला

आपको बता दे की भारत की पहली महिला द्रौपदी थी जिसके पांच पति थे। उस काल में महिलाओ की स्थिति बड़ी ही व्यथा सी थी जहा बहुपत्नी को समाज ने अपना लिया और वो चलन में चलने लगा ।

मासिक धर्म के बारे में खुलकर की थी बात

आपको बता दे की आज भी महिलाए अपने मासिक धर्म से जुडी बाते सिवाए अपने पति के किसी से नहीं बताती लेकिन द्रौपदी को जब कौरव केश खींचते हुए सभा में लाये तो पूरी सभा के सामने उन्होंने मासिक धर्म के बाद स्नान की बात राखी और कहा की उन्होंने वर्ष्ट्वस्नान भी नहीं किया है ।

सभा में बैठने का खुद लिया निर्णय

आपको बता दे की पहले सभा में यु महिलाओ का बैठना मना था लेकिन पांडवो के सब कुछ हारने के बावजूद भी द्रौपदी वही मौजूद कमरे में बैठी रही और सभा में आ गयी जो की उस समय मना था ।

दुशासन के लहू की रख दी थी मांग

आपको शायद ही इस बात की जानकारी हो की जब दुशासन द्रौपदी का चीर हरण करने के लिए सभा में उनके केश से खींचते हुए लाया तब ही राज्यसभा में उन्होंने ये ऐलान किया की पांडवो को सौगंध लेती है की वो तब तक अपने केश नहीं बांधेगी जब तक वो उन्हें दुशासन के लहू ने नहीं धुलेंगी ।