भरत भी अकेले ही लंका का नाश कर सकते थे पूरा सच चौंकाने वाला है

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दोस्तों आज हम आपको कुछ ऐसी बाते बताने जा रहे है जिसको सुनने के बाद श्याद आप सोचे की हम ब्रह्म फैला रहे है मगर ऐसा नहीं है हम किसी भी धर्म को ठेस पहुंचना नहीं चाहते। हम नहीं चाहते की हमारी वजह से किसी भी धर्म को नुक्सान पहुंचे । इतना ही नहीं हम यह भी नहीं चाहते की कोई इस बारे में हमारे लिए गलत सोचे दोस्तों हम सिर्फ आपको जानकारी देना चाहते है जिस से अगर भविष्या में आपसे कोई इस बारे में कुछ पूछे या बात करे तो आपको इस बारे में पूरी जानकारी हो । साथ ही हिन्दू धर्म की जानकारी तो हर उस हिन्दू को होनी चाहिए जो ईश्वर में विश्वास रखता है इतना ही नहीं आज की इस कहानी को पढ़कर आप भी सोच में पढ़ जाएंगे क्युकी इसका वर्णन रामायण में है मगर ना तो किसी ने इसको पढ़ा है ना तो किसी ने इसको सूना है।

मेघनाद के तीर से हुए थे घायल

आपको बता दे की मेघनाद के तीर से बुरी तरह से लक्ष्मण घायल हो गए थे। हैरानी की बात यह है की जब लक्ष्मण को तीर लगा तो वो उठ ही नहीं पाए जब तक कोई कुछ समझ पाटा था तो पता चला की वो काफी चोटिल हो गए है और मेघनाद के बाण से कोई बच नहीं पाटा अगर ऐसे में उन्हें संजीवनी बूटी नहीं मिली तो वो बच नहीं पाएंगे। ऐसे में हनुमान संजीवनी लेने निकल पड़े थे।

संजीवनी लेकर लौटते समय हनुमान हुए व्याकुल

दरअसल श्री राम अक्सर कथाओ में ये कहा करते थे की अगर भरत होता तो वो अकेले ही पूरी लंका का नाश कर देता। ऐसे में वो हनुमान को गाथा सुनाया करते थे। ऐसे में जब हनुमान जी संजीवनी लेने निकले तो उनको रास्ते में अयोध्या का दर्शन करने को मिला।

अयोध्या दर्शन में मिले भारत से

अयोध्या के ऊपर से जब हनुमान जा रहे थे। तो भारत को लगा का की यह कोई राक्षस है जो की राम के युद्ध में नुक्सान पहुंचाने के लिए जा रहा है तो ऐसा देख कर उन्होंने तुरंत ही हनुमान को तीर से प्रहार किया। जिसके बाद हनुमान जी भी बाण खा कर गिर गए।

करने लगे नाटक

जब बाण उनको लगा तो वो हेत राम करते हुए निचे गिर पड़े जिसके बाद भरत को एहसास हुआ की ये तो राम भगवान् का कोई लगता है इसकलिये उन्होंने तुरंत ही उसकी व्यथा जानी जिसके बाद हनुमान ने पूरी बात उनको बताई।

तीर पर बैठा कर भेजा

आपको बता दे की जब बात नहीं बनी तो भरत को अपनी गलती का एहसास हुआ जिसके बाद उन्होंने तुरंत ही उन्हें तीर पर बैठा कर भेज दिया। और हनुमान जी भी उनकी परीक्षा लेने लगे तो पता चला की वो उनकी परिसखा ले रहे थे।

हनुमान जी ने जाकर राम को बताया

तब जाकर हनुमान जी ने पूरी बात राम जी को बताई और कहने लगे की प्रभु आज आपने मेरा घमंड चूर कर दिया। उन्होंने मुझे बिठाने के बाद भी तीर कुछ यु उठाया की जैसे केवल तीर ही उठा रहे हो। मै उनका ये रूप देखकर मोहित हो गया।