इतने वर्षो बाद मिले प्रमाणों से पता चला कितनी भयंकर थी रामायण की पटकथा का अंत।

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वर्षो से विवादों का केंद्र बना हुआ रामायण ग्रन्थ वैज्ञानिको और लोगो के लिए शोध का छेत्र बना हुआ था जिसका ना कोई ऒर मिल रहा था ना ही कोई छोर मिल रहा था जिसके बाद भगवान् थे या नहीं या घटनाए हुई थी भी या नहीं इस बात पर एक बड़ा संशय रहा जिसके बारे में लोग आज भी बात करते है हलाकि ये परम्पराओ का विषय है यह आस्था से सम्बंधित है मगर सभी कीआस्था को सच मानते हुए आज वर्षो के बाद यह सबूत मिले है की रामायण ग्रन्थ की पठकथा एकदम सच थी जिसमे एक भी संशय नहीं किया जा सकता| आज दोस्तों हम आपको वो सबूत बताने ऒर दिखाने वाले है जिनको देखकर ये मानना ही पड़ेगा की रामायण सच्ची थी ऒर हिन्दुओ का वंश आज से नहीं बल्कि कई सालो से भारत में है। आइये जानते है उन तथ्यों के बारे में।

कई भ्रांतियों को किया है दूर

आपको बता दे की रामायण ने कई भ्रांतियों को दूर करते हुए यह सिद्ध किया है की यह बात सच है की राजा राम के भक्त हनुमान के पास ऐसी शक्ति थी की वो जब मन चाहे अपना स्वरुप छोटा ऒर बड़ा कर सकते थे। ऐसे में ही वो श्रीलंका में प्रवेश कर पूरी लंका जला कर आ गए थे।

सांप के घर जैसी गुफा

आपको बता दे की ऐसी गुफा की खोज की जा चुकी है, जहा रावण सीता माँ का हरण करने के बाद ले गया था, जी हां उस गुफा की खोज की जा चुकी है जब अपहरण कर के सीता माँ को रावण इस गुफा में लाया था इस गुफा के मुँह कोबरा सांप की तरह फन फैलाये हुआ था आज भी वो गुफा वैसी ही है।

हनुमान गढ़ी मंदिर

आपको बता दे की रामायण में हनुमान गढ़ी मंदिर का जिक्र है ऒर यह भी सच है की यह वही मंदिर है जहा हनुमान जी भगवान् श्रीराम का बैठ कर इन्तजार करते थे यह मंदिर अयोध्या में स्थित है जिसको पूरी तरह से भव्य बनाया गया है।

श्रीलंका में मिले पदचिन्ह

आपको बता दे की जब रावण सीता माँ को जबरन उठाकर लंका ले गया तो सब उनकी खोज में लग गए जटायु के माध्यम से ये बात पता चली की सात समुन्द्र पार रावण माँ सीता को छल से ले गया है मगर समुद्र इतना विशाल था की उसको लांगना सबके बीएस की बात नहीं थी , भगवान् राम ने समुद्र देव से विनम्र निवेदन भी किया मगर लहरें शांत नहीं हुई जिसके बाद हनुमान जी को उनकी शातिया जामवंत ने याद दिलाई ऒर उसके बाद हनुमान जी पूरा समुद्र पार कर के लंका पहुंचे उनका पहला चरण जहा पड़ा वह निशाँ पड़ गया जिसको लोग आज भी पूजते है।

राम सेतु

काफी प्रार्थना करने के बाद समुद्र देव प्रकट हुए ऒर कहा भगवन आपको मेरी पूजा याचना करने का क्या आवश्यकता है आप बस अपने नाम का एक पत्थर ही इसमें दाल दे वो अपने आप आपका रास्ता बना देगा जिसके बाद सभी वानर सेना ने राम नाम का पत्थर समुद्र में फेकना शुरू किया ऒर जो पल लंका तक के लिए बना उसको रामसेतु का नाम दिया गया।

तैरने वाले पत्थर

आपको अवगत करा दे की तैरने वाले पथरो को ये श्राप था की नील ऒर नल जिन पथरो को छू कर उसको समुद्र में डालेंगे वो तैरने लगेंगे जिसके बाद दोनों ने पत्थर को छू कर समुद्र में डाला जिस से एक पल का निर्माण हो गया , आपको बता दे की सुनामी में राम सेतु के कुछ पत्थर टूट कर अलग हो गए थे शोधकर्ताओं ने उनमे से कुछ पथरो को वापस पानी में डाला तो वो फिर से तैरने लगे।

द्रोणागिरी पर्वत

आपको बता दे की हिमालय में आज भी वो पर्वत विराजमान है जहा जड़ी बूटियों का भण्डार है आपको जानकार हैरानी होगी की जब मेघनाद ने तीर से लक्ष्मण को घायल कर दिया था तो उनकी जान बचाने के लिए हनुमान जिको जड़ी बूटी लाने के लिए भेजा गया झा उनके कुछ समझ ना आया इसलिए वो इस पर्वत को ही उखाड़ लाये।

जड़ी बूटियों के अंश

आपको बता दे की जहा लक्ष्मण जी मूर्छित होकर गिर पड़े थे वही पर उनका इलाज जड़ी बूटियों के माध्यम से किया गया था शोधकर्ताओं ने वह पर जड़ी बूटियों के अंश भी पाए है।

अशोक वाटिका

जब रावण माता सीता का हरण कर के लंका ले गया तो उन्होंने महल में रहने से साफ़ मना कर दिया जिसके बाद रावण ने उन्हें एक बाग़ में रहने का स्थान दिया जहा पल पल पर निगरानी राखी जानी थी बाद में लंका में स्थित इस बाग़ का नाम अशोक वाटिका पड़ा।