देखिये कैसे भारतीय जवानो ने 4 घंटे की सर्जिकल स्ट्राइक में आतंकियों का किया था सफाया

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उरी में भारतीय सेना के कैंप पर हुए हमले में हमारे 18 जवान शहीद हुए थे जिससे सारा देश रोया था ये बात सितम्बर 2016 की है जब ये हमला हुआ था उस समय मीडिया और विपक्ष सरकार सब बहस में लगे हुए थे उसी दौरान सेना एक खास ऑपरेशन की नीव रख रही थी उरी में शहीद हुए जवानो का बदला लिए बीने रहा नहीं जा रहा था भारत ने ठान लिए था की अब इंट का जबाब पत्थर से देना है ताकि ऐसा हमला करने वाले आतंकी हमला करने से पहले 100 बार सोचले की उसका अंजाम क्या होगा।

सर्जिकल स्ट्राइक वाले दिन

सेना और सरकार ने आपस की रणनीति बना ली थी जो 28-29 सितम्बर की रात को अंजाम देने के लिए एक स्पेशल टीम चुनी गयी थी आपको बता दे की केवल 4 घंटे के अंदर भारतीय सेना ने आतंकियों का सफाया करदिया था।

4 घंटो मे क्या-कया हुआ था

भारतीय सेना का मिशन रात के ठीक 12.30 बजे शुरू हो चूका था जिसमे स्पेशल फाॅर्स के पैराट्रूपर्स को शामिल किया गया था इसके बाद पूरी टीम को loc पर एयरड्रॉप किया गया उसके बाद टीम ने आगे का सफर पैदल ही किया भारतीय जवान सीमा से 3 km तक घुस गए थे।

सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान

भारतीय जवानो ने भीमबेर, हॉटस्प्रिंग, केल और लीपा सेक्टर में स्ट्राइक की थी वहा सभी लांच पैड्स को तबाह कर दिया गया था इस सर्जिकल स्ट्राइक में 38 आतंकी और 2 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे लेकिन भारतीय जवानो को एक खरोच तक नहीं आई थी ऑपरेशन सुबह होते होते 4.30 बजे खत्म हुआ था।

सर्जिकल स्ट्राइक का क्यों लिया था फैसला

दरसल लगातार घूसपैठ बढ़ने से डायरेक्टर जर्नल ऑफ़ मिलिट्री रहे ले. जनरल रणबीर सिंह ने घुसपैठ को ही मुख्य कारण समझा कुछ न्यूज़ रिपोर्टर के मुताबिक सर्जिकल स्ट्राइक का पहले भी काफी बार सरकार के सामने विकल्प रखा गया लेकिन सरकार ने कभी पास नहीं किया लेकिन मोदी सरकार ने जवानो के बदले के लिए यह फैसला लिया था।

सर्जिकल स्ट्राइक का महत्त्व

यह एक तरह की सेना करवाई होती है जिसमे केवल चुने हुए ही टारगेट को खत्म करना होता है सर्जिकल स्ट्राइक में कम से कम नुकसान में ज्यादा से ज्यादा दुश्मनो का सफाया करना होता है और इसमे आम जनता और जनता की प्रॉपर्टी को निशाना नहीं बनाया जाता और इसमे स्पेशल टीम फाॅर्स को हवाई रास्ते के जरिए दुश्मनो के इलाके में भेजा जाता है या फिर हवा से ही हमला किया जाता है।