वीडियो:- 5 पांडवों के साथ द्रोपदी के “सुहागरात” के बारे में जानकर आपके भी होश उड़ जाएंगे !

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दोस्तों अभी हाल ही में दूरदर्शन चैनल पर आपने रामायण और महाभारत की रेटेलिकास्टिंग देखी होगी । मशहूर टीवी डायरेक्टर रामानुज सागर के निर्देश में बनी महाभारत में द्रौपदी के चीरहरण को भी बख़ूबी दिखाया गया था। मगर इसके बावजूद कई अनछुए पहलुओं को आजतक कोई नही जान पाया है। आज हम आपको हिन्दू धर्म के सबसे बड़े युद्द की दास्तान सुनाने जा रहा हूँ , जिसमें एक स्त्री की इज़्ज़त को जिस तरह तार तार किया गया वो सबसे दुर्भाग्यपूर्ण था। महाभारत की जंग में कौरवों और पांडवों के बीच हुए खून ख़राबे की कहानी इतिहास में दर्ज है । इतिहासकारों इस युद्ध को विश्व का सबसे बड़ा युद्ध कहा था । दोस्तों क्या आप जानते हैं की कैसे पांच पांडवों ने द्रौपदी के साथ सुहागरात मनाई थी ? यदि आपने द्रौपदी के चिरहरण की कहानी सुनी है तो आपको यह ज़रूर मालूम होगा की कैसे द्रौपदी का चरित्रहनन किया गया था।

वैसे तो महाभारत के बारे में लगभग सभी भारतीय जानते हैं…


वैसे तो महाभारत के बारे में लगभग सभी भारतीय जानते हैं , की इस कहानी में पांच पांडवों ने एक ही स्त्री से शादी की थी और उसके साथ सुहागरात भी मनाई थी । दरअसल जब राजा दूपद्र अपनी निसंतान बीवी की पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ कर रहे थे तो उस वक्त एक विशेष यज्ञ से पुत्र के साथ साथ द्रौपदी भी जन्मी थी । चूंकि राजा द्रुपद्र और द्रोणाचार्य काफी जमाने से एक दूसरे का वध करने का षड्यंत्र बनाते रहते थे इसीलिए राजा द्रुपद अपने पुत्र के जरिए द्रोणाचार्य का वध करना चाहते थे। इस प्रक्रिया के फल स्वरुप राजा द्रुपद ने अपने हवन कुंड से जन्मी द्रौपदी को मधु का दर्जा देने को तैयार हो गए। कहा जाता है कि राजा द्रुपद ने अपने बेटी द्रौपदी की विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन किया था, जिसमें द्रोणाचार्य के शिष्य अर्जुन ने स्वयंवर के सभी शर्तों को पूरा कर द्रौपदी को अपना पत्नी बना लिया था।

महाभारत में लिखे एक श्लोक के अनुसार जिस वक्त स्वयंवर…


महाभारत में लिखे एक श्लोक के अनुसार जिस वक्त स्वयंवर आयोजित हुआ था , उस वक्त पांचो पांडव अपनी मां कुंती के साथ अपना पहचान छुपाकर ब्राह्मण के भेष में रहा करते थे और भिक्षा मांग कर काम चलाते थे। पांडव जितनी भी भिक्षा इकट्ठा करते थे उन सबको अपनी मां कुंती के आगे रख दिया करते थे। मां कुंती उस भिक्षा को पांचों पांडवों में बराबर बराबर बांट दिया करती थी। जब अर्जुन द्रौपदी को विवाह करके घर लाए तो अर्जुन ने घर के द्वार से ही कुंती को कहा कि देखो मां आज हम लोग तुम्हारे लिए क्या लाए हैं। माँ को लगा कि आज भी उसके बेटे हमेशा की कोई चीज़ लाये होंगे। बस इसी गलतफहमी में उन्होंने ये कह दिया जो भी लाए हो उसे पाँचों भाइयों में बराबर बांट लो। दोस्तों इस कहानी के सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में से एक हिस्सा इस बात से क्लियर हो जाता है कि जो भी घटना घटी वह कोई साधारण घटना नहीं थी वह बहुत बड़ी स्त्री की अस्मिता के खिलाफ थी ।

लेकिन इस असमंजस और मिस अंडरस्टैंडिंग की वजह से एक….


लेकिन इस असमंजस और मिस अंडरस्टैंडिंग की वजह से एक बहुत बड़ा गलत घटना घटित हो गई, जो मानवता को शर्मसार कर देने वाली थी । हालांकि इस घटना से मां कुंती बिल्कुल अनजान थी क्योंकि उन्होंने ने ये जानबूझकर नहीं किया , बल्कि ये एक गलतफहमी की वजह से घटित हुई और इतिहास के पन्नों में यह कहानी छप गई। दरअसल जब हमारी टीम द्रोपदी के चीर हरण के घटना का विश्लेषण कर रही थी तो हमें भी इसी तरह का किसी बात का अंदेशा था की द्रौपदी के चरित्र हनन का कुछ ना कुछ कारण तो होगा।

जैसा कि हमने इस वीडियो में पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दिया की…


जैसा कि हमने इस वीडियो में पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दिया की जब अर्जुन ने दरवाजे पर से ही अपनी मां कुंती को द्रौपदी के बारे में बताया तो अर्जुन की मां ने द्रौपदी की के बारे में ठीक से नहीं सुना , क्योंकि वो अपने काम में व्यस्त थी, और मां कुंती ने यह बोलकर अर्जुन को अंदर बुलाया की जो भी है अपने पांचों भाइयों में बांट लो । अब चूंकि अर्जुन भी पांच पांडवों में से एक था , तो भिक्षा बटवारा नियम के तहत अर्जुन ने भी द्रौपदी का बंटवारा कर लिया । क्योंकि जितने भी पांडव भाई थे, वह काफी सत्यवादी और मां के आदेशों का पालन करने वाले थे । जो भी मां कहती थी वह निसंकोच उसको पूरा करते थे। इसी चीज को वोह अपना धर्म समझते थे। जब कुंती ने द्रौपदी को देखा तो बहुत परेशान हो गई कि उन्होंने यह क्या कह दिया ।

इस पर उन्होंने अपने पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर से कहा कि कोई रास्ता…


इस पर उन्होंने अपने पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर से कहा कि कोई रास्ता निकालो जिससे कोई अनर्थ ना हो द्रौपदी के अस्मिता का लाज भी बच जाए और मेरे मुख से निकला बात झूठ भी ना हो। तभी युधिष्ठिर अपनी मां कुंती को महर्षि व्यास के पास ले गए और महर्षि व्यास ने कहा की द्रौपदी को शंकर भगवान ने पिछले जन्म में वरदान दिया है तभी इस जन्म में ऐसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। महर्षि व्यास के धार्मिक आस्था समझाने के बाद मां कुंती पांचों पांडवों के साथ द्रौपदी के विवाह के लिए राजी हो गई और इसके बाद द्रौपदी का विवाह सबसे पहले सबसे बड़े पुत्र युधिष्ठिर के साथ हुआ उसके बाद क्रमशः भीम, अर्जुन, नकुल और सहदेव के साथ हुआ और द्रौपदी ने बारी-बारी सभी भाइयों के साथ पत्नी धर्म निभाया। हम अपने व्यूवर्स को अवश्य बताना चाहेंगे कि इस तरह के परिस्थिति को कभी भी दूसरे नजर से ना देखकर उसके असल वजह को जानने की कोशिश करनी चाहिए ताकि भविष्य में कभी ऐसा अनर्थ होने की संभावना ना हो। उम्मीद है आपको हमारी विडियो पसंद आई होगी , तो इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर कीजिए।

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