जब भारत के लिए पाकिस्तान से भिड़ गया रूस।

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आजादी के बाद से भारत और पाकिस्तान आज तक कभी भी सुकून से नहीं बैठे हैं , और ना ही इन दो देशों की सरकारों के बीच में कभी इतनी मधुरता आई जिससे इन दो पड़ोसी मुल्कों के आपसी तालमेल ठीक हो सके। इन दो देशों के अलावा आज पूरी दुनिया जानती है कि भारत और पाकिस्तान एक दूसरे के कितने बड़े दुश्मन हैं । लेकिन आज हम बात करेंगे साल 1971 के उस युद्ध की जहां पाकिस्तान को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा था । जी हां दोस्तों आजाद भारत के साथ पाकिस्तान की यह दूसरी युद्ध थी और उस वक्त कि प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के सशक्त नेतृत्व में भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नाको चना चबा दिए थे। इससे पहले भी कांग्रेस शासित केंद्र के दौरान 1965 की जंग में भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह पराजित किया था , लेकिन पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से कभी बाज नहीं आया। पर उस युद्ध के जीत के साथ साथ एक बात और साफ हो गई थी कि चाहे कुछ भी हो जाए, रूस भारत का साथ कभी नहीं छोड़ेगा। जी हां दोस्तों आज की हमारी यह खास वीडियो इसी बात पर आधारित है कि रूस भारत का कितना घनिष्ठ मित्र है।

आज भी भारत के संबंध रूस के साथ कहीं बेहतर हैं…

आज भी भारत के संबंध रूस के साथ कहीं बेहतर हैं, लेकिन यह कोई आज की नई बात नहीं है। बल्कि 1971 के वक्त ही एक विशेष संधि के बाद रूस ने भारत के ऊपर अपनी दोस्ती और मंशा दिखा कर यह साबित कर दिया था कि चाहे कुछ भी हो जाए वह भारत को कभी अकेला नहीं छोड़ेगा । यही वजह थी कि 1971 के जंग के दौरान जब भारतीय सेना अपनी पूरी ताकत और शौर्य के साथ पाकिस्तानी आर्मी का सामना कर रही थी , तो उस वक्त ऐसा लग रहा था मानो पाकिस्तान बस चंद दिनों में ही हार जाएगा। लेकिन यह राह इतनी आसान नहीं थी दोस्तों । इंदिरा गांधी के कई प्रयासों के बावजूद पाकिस्तान अपनी होशियारी दिखाने से बाज नहीं आ रहा था, वह लगातार अमेरिका और चीन के संपर्क में आकर मदद की गुहार लगा रहा था । आपको बता दें कि उस वक्त पाकिस्तान दो हिस्सों में बटा हुआ था। आजादी के बाद पाकिस्तान को बंटवारे में दो अलग-अलग हिस्से मिले, जिसमें पश्चिमी पाकिस्तान और पूर्वी पाकिस्तान शामिल है।

पूर्वी पाकिस्तान यानी ईस्ट पाकिस्तान जो इस समय…

पूर्वी पाकिस्तान यानी ईस्ट पाकिस्तान जो इस समय बांग्लादेश के रूप में एक स्वतंत्र देश है । लेकिन इसके पीछे भी एक बहुत लंबी कहानी है क्योंकि पाकिस्तान के दो टुकड़े करने वाली पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री जिन्हें हम आयरन लेडी के नाम से भी जानते हैं, यानी इंदिरा गांधी ने अपने बहुत ही कुशल नीति और सख्त फैसलों के द्वारा पाकिस्तान को दो अलग-अलग टुकड़ों में बांट दिया था । और यही वजह है कि पाकिस्तान उस वक्त काफी कमजोर पड़ गया। दरअसल देखा जाए तो इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी थी , क्योंकि आधी से ज्यादा आबादी बांग्लादेश की ओर सिमट कर रह गई थी, जो कि अब पाकिस्तान का साथ देने को बिल्कुल भी तैयार नहीं थी। ना वहां के नेता ना ही वहां की आर्मी। क्योंकि पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच की दूरी इतनी ज्यादा थी एक जगह से बैठकर दोनों प्रदेशों में शासन करना काफी मुश्किल लग रहा था। मगर पाकिस्तान ने जब अमेरिका से मदद मांगी तो अमेरिका जैसा देश इस मामले में सिर्फ इसलिए कूद गया क्योंकि उसे पता था कि अगर भारत ने पाकिस्तान को युद्ध में पराजित कर दिया तो फिर वह एशियाई मुल्कों में अपनी पकड़ काफी मजबूत कर लेगा।

वह इंदिरा गांधी के कुशल नीति और मजबूत हस्तक्षेप से…

वह इंदिरा गांधी के कुशल नीति और मजबूत हस्तक्षेप से भी अवगत था, इसीलिए उसने सोचा कि उसकी देश की वर्चस्व एशियायी मूल्यों में कायम रखने के लिए उसे हर हाल में भारत को जीतने से रोकना होगा। साथ ही चीन भी इसीलिए पाकिस्तान का साथ देने लगा क्योंकि वह खुद भी अपनी बादशाह कायम करना चाहता था । ऐसे में जब भारत अकेला पड़ गया, उस वक्त रूस ने भारत का साथ दिया और उसके साथ के बदौलत ही भारतीय इतिहास में 1971 का युद्ध सुनहरे अक्षरों में लिखा जाता है । 3 दिसंबर 1971 की रात को जब पाकिस्तान ने अचानक भारत के ऊपर आक्रमण कर दिया तो भारत भी इस हमले के लिए पूरी तरह से तैयार था। 4 दिसंबर को भारत पहली बार अपने तीनों सेनाओं के साथ इस युद्ध में पाकिस्तान को ताबड़तोड़ जवाब दे रहा था। लेकिन कुछ ही दिनों के बाद यह बात साफ होने लगी थी कि भारत बहुत ही जल्द पाकिस्तान को ध्वस्त कर देगा, और ऐसा ही हुआ भी । क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद यह पहला ऐसा युद्ध था जहां पर इतने बड़े आर्मी सिलेंडर की बात सामने आई थी ,और वजह था भारत का आक्रमक रवैया और रूस जैसे सशक्त और शक्तिशाली देशों का साथ।

युद्ध के वक्त अमेरिका चीन के साथ मिलकर भारत के…

युद्ध के वक्त अमेरिका चीन के साथ मिलकर भारत के ऊपर यह दबाव बना रहा था कि वह पूर्वी पाकिस्तान यानी कि बांग्लादेश के मुद्दे पर कोई हस्तक्षेप ना करें । तो आखिर क्या थी रूस और भारत के बीच की संधि जिसने पाकिस्तान का तख्तापलट कर दिया ।दरअसल इंदिरा गांधी ने एक बहुत ही कठोर कदम लेते हुए 9 अगस्त 1971 को सोवियत यूनियन के साथ शांति भाईचारे और सहयोगी संधि पर हस्ताक्षर कर दिए जिस बात से अमेरिका पूरी तरह से भारत के विरोध में आ गया था। 4 दिसंबर को इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लागू करके सेना को पाकिस्तान में तेज आक्रमण करने का आदेश दे दिया था , और उनके इस सख्त रवैए ने ही देश को युद्ध में गर्व के साथ जीत दिलाई थी । पाकिस्तानी आर्मी इस उम्मीद से युद्ध में लड़ाई कर रही थी कि चीनी सेना उसकी मदद करेगी, लेकिन हकीकत तो यहीं है कि चीन ने कभी भी इस युद्ध में पाकिस्तान का साथ नहीं दिया । नतीजा यह हुआ कि रूस के खतरनाक एयरक्राफ्ट अमेरिकी सेना के ऊपर लगातार अटैक कर रहे थे और साथ ही अमेरिका भी अब अलग-थलग को अकेला पड़ रहा था इस वजह से 16 दिसंबर को पाकिस्तान ने पूरी तरह आत्मसमर्पण कर दिया था । तो दोस्तों की जीत ही भारत और रूस के दोस्ती की एक बेहतरीन मिसाल जिसे आज भी इतिहास में याद किया जाता है । उम्मीद है आपको हमारी यह वीडियो पसंद आई होगी इसे ज्यादा से ज्यादा शेयर करके अपने दोस्तों तक भी पहुंचाए।

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