आज भी इस देश में है समुद्र मंथन से निकला अमृत है इखट्टा

445

इंडोनेशिया एक मुस्लिम देश है। जहां इस कलश के होने का दावा किया जा रहा है वह कंडी सुकुह नामक एक प्राचीन मंदिर है। इसी मंदिर में इस कलश के मौजूद होने की खबर सामने आई है। बताया जा रहा है कि इसमें एक द्रव्य हजारों सालों से मौजूद है। माना जाता है कि यह अमृत है जो हजारों साल से नहीं सूखा। माना जाता है की यहाँ का द्रव्य हमेशा से ही गिला रहा जो कभी सूखा ही नहीं अब ऐसे में स्थिति यह है की कभी नहीं सूखने वाला यह यह अमृत आज भी देश में है। आपको जानकार हैरानी होगी की इसको अभी तक कोई भी नहीं देख सका है। यहां मंदिर में एक दीवार पर महाभारत का आदिपर्व अंकित है जो इसके प्रमाण भी देता है। इसका पता तब लगा जब 2016 में पुरातत्व विभाग मरम्मत का कार्य करवा रहा था, तभी इस मंदिर की दीवार की नींव से एक्सपर्ट्स की टीम को यह कलश मिला था।

इंडोनेशिया में है मंदिर

पाया गया कि तांबे के बर्तन से इसकी बड़ी बारीक जुड़ाई की गई है ताकि इसे खोला न जा सके। सबसे हैरानी की बात यह है कि ये जिस दीवार में ये पाया गया, उस पर अमृत मंथन की नक्काशी मौजूद है। इस कलश की कॉर्बन डेटिंग लगभग बारहवीं सदी की बताई जाती है।

कई अवशेष भी मिले है

और उन्ही मंदिरों में से एक है कैंडी सुकुह टेम्पल जिसका काफी हिस्सा ध्वस्त हो चूका है,यह मंदिर मुख्य जावा आइलैंड के बीच में स्तिथ है,इसमें महाभारत काल से जुड़ी कई कलाकृतियाँ मौजूद हैं,इसी मंदिर में कई बेशकीमती अवशेष भी प्राप्त हुवे हैं जिनमे शताब्दी पुराना एक शिवलिंग मिला है,ये शिवलिंग स्फटिक से बना हुआ है जिसे एक पीतल के बर्तन के भीतर काफी सुरक्षित तरीके से रखा गया है और इन सभी अवशेषों को इंडोनेशिया के राष्ट्र संघ्रालय में रख दिया गया है।

पीतल के बर्तन में है तरल पदार्थ

पीतल के बर्तन में पानी के जैसा एक तरल पदार्थ भरा हुआ है और हैरान कर देने वाली बात ये है कि सदियाँ बीत जाने के बाद भी ये पानी आज तक सूखा नहीं है वहां के लोगों की मान्यता के अनुसार ये अमृत है और कई विद्वान ये भी बताते हैं कि ये समुद्र मंथन से निकला अमृत है जिसे शिवलिंग से बंद कर दिया गया है।